दुख की पोटली
एक बार एक शहर मे एक साधु जी आए ,भक्तों ने उनसे विनती की महाराज हम बहुत दुखी
हैै ,हमारे दुख दूर करो,महाराज बोले ऐसा करो सब अपने अपने दुख की पोटली लेकर आना
और इस पैैड के नीचे रख देना,मैै तुम्हारे दुख दूर कर दूंगा ़।
दूसरे दिन सब लोग अपने अपने सिर पर पोटली रखकर बड़े खुश खुश
आए ,किसी की पोटली छोटी किसी की बड़ी ,पर सब बड़े खुश सोच रहे थैै कि अब सब दुख
ख़त्म ,अब बाबा बोले ऐसा करो सबअपनी अप नी पोटली रख दो और जो पोटली अच्छी लगे
वह उठालो ,अब सब सोच में पड गए ,अपने दुख तो जाने पहचाने दूसरे में जाने क्या हो?
सबने एक दूसरे को देखा और सब अपनी अपनी पोटली ले कर वापिस चले गए ।
ऐसा ही कुछ अनुभव मुझे USA जाने पर हुआ ,शुरु शुरु में बड़ा अच्छा
लगा,वैसे भी बच्चों के साथ रहना मेरे लिए बहुत ही अनमोल समय बिताना है ,nothing is like
That दुनिया की कोई भ़ी खुशी उसके सामने फीकी है,क्यों कि busy gynaecologist
होने के कारण family के साथ समय बिताने के लिए हमेशा ही तरसना पड़ा है,फिर इसबार
पूरे तीन महीनों का समय सिर्फ़ हमारा ना कौई मरीज़ ना emergency ,I was so excited
पर,जैसे जैसे समय बीतने लगा अपने देश की चहलपहल याद आने लगीऔर अमेरिका की शान्ति ,सन्नाटा काटने लगा ।अजीब सा depression हावी होने लगा,बच्चे early morning घर से
निकलते थकथका कर शाम को घर आते खाना खाते व सुबह जल्दी जाने की चिन्ता में जल्दी सो जाते ,मुझे समझ नहीं आता था कि मैं क्या करुं ? मेरे पास एक नन्ही सी जान ,वो कभी मेरे पास
कभी अपनी मम्मी के साथ सोती,धीरे धीरे समय निकलता गया ,पोती से मोह बढ़ता गया ,वो पहचानने लगी थी व respond करने लगी थी,और देश की याद भी तीव्र हो रही थी। बच्चों के
चेहरों पर भी चिन्ता की लकीरे साफ दिख रही थी,माँ के जाने के बाद बच्चे को कौन सम्भालेगा
उसकी security & care का क्या होगा ?बच्चो से ज्यादा मैं परेशान थी,इधर पोती उधर
पति व अस्पताल ,सोचा पोती को ही साथ ले जाऊं सारी problem solved,but यह सुझाव
बच्चों को पसन्द नहीं आया .वे अभी नये नये parent बने थे उनके मन मैं बच्चे के प्यार के
अलावा और कोइ ख्याल था ही नहीं ,प्यार हो या नफरत जब इन्सान उसमें अंधा हो जाये
तो विवेक शून्य हो जाता है भले बुरे की समझ खो जाती है ,ख़ैर ३ महीने के बाद जब अपने
देश आए और वापिस अपनी कुर्सी पर बैठे तब जाना कि असल में ,मैं क्या miss कर रही थी?
My identity .
So I am happy here seeing and treating my patients,every body was
asking me where were you?we missed you very much,and so on----------
अब आप बताइए USA की सुन्दरता व सफ़ाई is more important or your
Identity & self respect.I miss my kids but ,what to do?
मुझे लगता है यह समस्या अाजकल ज़्यादातर parents की है वे बच्चों के साथ as a family
रहना चाहते है पर ,अपनी पहचान के साथ,बच्चे career की दौड़ में भाग रहै है,वे भी परेशान
है,confused है पर समझ नहीं पा रहे है ।सब अपनी अपनी पोटली को ढो रहै है ।
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